1. प्रस्तावना
‘आधुनिकता’ आधुनिक जीवन-बोध से जुड़ी एक व्यापक अवधारणा है। यह केवल वर्तमान समय में जीने का नाम नहीं, बल्कि परंपरागत मान्यताओं, रूढ़ियों और जड़ विचारों की आलोचनात्मक समीक्षा करते हुए तर्क, विवेक, स्वतंत्रता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और परिवर्तन को स्वीकार करने की चेतना है। साहित्य में आधुनिकता मनुष्य और समाज को देखने की नई दृष्टि प्रदान करती है। हिंदी कविता में आधुनिकता का प्रभाव विशेष रूप से छायावादोत्तर कविता, प्रयोगवाद, नई कविता तथा समकालीन कविता में दिखाई देता है।
2. आधुनिकता से क्या अभिप्राय है?
‘आधुनिकता’ का सामान्य अर्थ है—नवीन समय और उसकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होने वाली जीवन-दृष्टि।
आधुनिकता अंग्रेजी के Modernity का हिंदी रूप है। आधुनिकता का संबंध केवल नई वस्तुओं, तकनीक या आधुनिक जीवन-शैली से नहीं है, बल्कि यह मानसिकता और दृष्टिकोण में परिवर्तन का नाम है।
आधुनिक व्यक्ति परंपरा को आँख बंद करके स्वीकार नहीं करता, बल्कि उसे तर्क और विवेक की कसौटी पर परखता है। वह व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, अधिकार और गरिमा को महत्त्व देता है।
सरल शब्दों में—
> आधुनिकता वह चेतना है जो व्यक्ति और समाज को रूढ़ियों से मुक्त करके तर्क, विवेक, स्वतंत्रता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और परिवर्तन की ओर ले जाती है।
आधुनिकता में व्यक्ति अपने अस्तित्व, स्वतंत्रता और अधिकारों के प्रति अधिक सजग होता है।
3. आधुनिकता की अवधारणा
आधुनिकता की अवधारणा को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है—
1. नवीनता की चेतना
आधुनिकता पुराने और जड़ विचारों के स्थान पर नए विचारों और जीवन-मूल्यों को स्वीकार करती है।
2. तर्क और विवेक
आधुनिक व्यक्ति किसी भी परंपरा या मान्यता को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता कि वह पुरानी है। वह उसकी उपयोगिता को तर्क की कसौटी पर परखता है।
3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिकता का एक प्रमुख आधार वैज्ञानिक चेतना है। अंधविश्वास और रूढ़ियों के स्थान पर वैज्ञानिक सोच को महत्त्व दिया जाता है।
4. व्यक्ति की स्वतंत्रता
आधुनिकता व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय और व्यक्तित्व को महत्त्व देती है।
5. समानता की भावना
जाति, वर्ग, लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर होने वाले भेदभाव का विरोध आधुनिक चेतना का महत्त्वपूर्ण पक्ष है।
6. परिवर्तन की स्वीकृति
आधुनिकता स्थिरता के बजाय निरंतर परिवर्तन को स्वीकार करती है।
7. परंपरा का पुनर्मूल्यांकन
आधुनिकता परंपरा को पूरी तरह नकारती नहीं है। वह परंपरा में उपयोगी तत्वों को स्वीकार करते हुए उसकी रूढ़ियों की आलोचना करती है।
8. मानवीय दृष्टिकोण
आधुनिकता का केंद्र मनुष्य है। मनुष्य की गरिमा, स्वतंत्रता और सुख को विशेष महत्त्व दिया जाता हैं।
4. आधुनिकता के प्रमुख घटक
आधुनिकता एक बहुआयामी अवधारणा है। इसके प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं—
(1) वैज्ञानिक चेतना
विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधुनिकता के प्रमुख आधार हैं।
(2) तर्कशीलता
अंधविश्वास के स्थान पर तर्क, विवेक और प्रश्न करने की प्रवृत्ति आधुनिकता की पहचान है।
(3) व्यक्तिवाद
व्यक्ति के स्वतंत्र अस्तित्व, निजी अनुभव और आत्मसम्मान को महत्त्व देना।
(4) स्वतंत्रता
विचार, अभिव्यक्ति और जीवन के चुनाव की स्वतंत्रता।
(5) समानता
जाति, धर्म, वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव का विरोध।
(6) लोकतांत्रिक चेतना
व्यक्ति के अधिकार, लोकतंत्र, न्याय और सहभागिता की भावना।
(7) औद्योगीकरण और नगरीकरण
आधुनिक समाज के विकास में उद्योग, मशीन और नगरों की भूमिका ने जीवन को गहराई से प्रभावित किया।
(8) आर्थिक चेतना
पूँजीवाद, श्रम, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और उपभोक्तावाद जैसे प्रश्न आधुनिक जीवन के महत्त्वपूर्ण प्रश्न बने।
(9) सामाजिक परिवर्तन
परिवार, विवाह, स्त्री-पुरुष संबंध, जाति व्यवस्था और सामाजिक संबंधों में परिवर्तन।
(10) अस्तित्व-बोध
आधुनिक मनुष्य अकेलेपन, असुरक्षा, तनाव, निरर्थकता और अस्तित्व के संकट का अनुभव करता है।
(11) मानवतावाद
मनुष्य को केंद्र में रखकर उसके अधिकारों और गरिमा की चिंता करना।
(12) धर्मनिरपेक्षता
धार्मिक कट्टरता के स्थान पर सहिष्णुता, विवेक और मानवीय मूल्यों को महत्त्व देना।
5. आधुनिक हिंदी कविता में आधुनिकतावाद
आधुनिकतावाद आधुनिक जीवन की जटिलताओं, संघर्षों, विडंबनाओं और बदलती मानसिकता को अभिव्यक्त करने वाली साहित्यिक प्रवृत्ति है।
हिंदी कविता में आधुनिकतावादी चेतना का विकास विशेष रूप से छायावाद के बाद हुआ। छायावादी कविता में जहाँ प्रकृति, प्रेम, सौंदर्य, आत्मानुभूति और रहस्यात्मकता प्रमुख थी, वहीं बाद की कविता में यथार्थ, व्यक्ति-संकट, सामाजिक विसंगतियाँ, राजनीतिक व्यवस्था, शहरी जीवन, अकेलापन और अस्तित्व की समस्या प्रमुख होकर सामने आई।
हिंदी कविता में आधुनिकता की मजबूत अभिव्यक्ति प्रयोगवाद और नई कविता में दिखाई देती है। अज्ञेय, मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, भवानीप्रसाद मिश्र, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना, केदारनाथ सिंह आदि कवियों ने आधुनिक जीवन की विभिन्न समस्याओं को अपनी कविता का विषय बनाया।
6. आधुनिकतावादी हिंदी कविता की प्रमुख विशेषताएँ
1. यथार्थ-बोध
आधुनिक कविता जीवन के वास्तविक और कठोर पक्षों को सामने लाती है। इसमें गरीबी, शोषण, बेरोजगारी, युद्ध, राजनीतिक भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता जैसे विषय दिखाई देते हैं।
2. व्यक्ति की केंद्रीयता
आधुनिक कविता में व्यक्ति अपने सुख-दुःख, अकेलेपन, असुरक्षा और अस्तित्व के प्रश्नों के साथ उपस्थित होता है।
3. अस्तित्व-बोध
आधुनिक मनुष्य के सामने यह प्रश्न रहता है कि उसका जीवन क्या है, उसका उद्देश्य क्या है और समाज में उसका स्थान क्या है। यह अस्तित्वगत चिंता आधुनिक कविता का महत्त्वपूर्ण पक्ष है।
4. अकेलापन और अजनबीपन
नगरीय जीवन और बदलते सामाजिक संबंधों ने व्यक्ति को भीड़ में रहते हुए भी अकेला बना दिया। आधुनिक कविता इस अकेलेपन को अभिव्यक्त करती है।
5. मोहभंग
स्वतंत्रता के बाद भी जब सामाजिक और राजनीतिक समस्याएँ समाप्त नहीं हुईं, तो कवि के भीतर व्यवस्था के प्रति मोहभंग उत्पन्न हुआ।
6. विद्रोह और प्रतिरोध
आधुनिक कविता रूढ़ियों, अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध आवाज उठाती है।
7. सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना
आधुनिक कवि अपने समय की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ा रहता है। सत्ता, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विडंबनाओं पर प्रश्न उठाता है।
8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक कविता अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक और तार्किक सोच को महत्त्व देती है।
9. परंपरा का पुनर्मूल्यांकन
आधुनिक कवि परंपरा को पूरी तरह अस्वीकार नहीं करता बल्कि उसे नए संदर्भ में देखता है।
10. स्त्री चेतना
आधुनिक कविता में स्त्री के स्वतंत्र व्यक्तित्व, अधिकार, अस्मिता और सामाजिक स्थिति के प्रश्नों को महत्त्व मिला।
11. शहरी जीवन की अभिव्यक्ति
महानगर, मशीन, भीड़, यातायात, कार्यालय, बाजार और बदलते पारिवारिक संबंध आधुनिक कविता के नए विषय बने।
12. भाषा में नवीन प्रयोग
आधुनिक कवियों ने कविता की भाषा को अधिक बोलचाल, सहज, प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक बनाया। परंपरागत काव्य-भाषा के स्थान पर जीवन के निकट भाषा का प्रयोग हुआ।
13. मुक्तछंद का प्रयोग
छंद की कठोर सीमाओं से मुक्त होकर कवियों ने मुक्तछंद को अपनाया। इससे भावों और विचारों को स्वतंत्र अभिव्यक्ति मिली।
14. प्रतीक और बिंब
आधुनिक कविता में प्रतीक, बिंब, मिथक और संकेतों का व्यापक प्रयोग हुआ।
15. व्यंग्य
व्यवस्था और सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य आधुनिक कविता की विशेष पहचान है।
7. आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ
आधुनिक हिंदी कविता में अनेक प्रवृत्तियाँ समानांतर रूप से विकसित हुईं—
प्रयोगवाद → नई कविता → अकविता → समकालीन कविता
इनमें निम्न प्रवृत्तियाँ विशेष रूप से दिखाई देती हैं—
1. व्यक्तिवाद और आत्मचेतना
2. अस्तित्ववादी चेतना
3. यथार्थवाद
4. मोहभंग
5. विद्रोह और प्रतिरोध
6. राजनीतिक चेतना
7. सामाजिक विसंगतियों का चित्रण
8. महानगरीय जीवन-बोध
9. अकेलापन और अजनबीपन
10. स्त्री अस्मिता
11. दलित और वंचित वर्ग की चेतना
12. शोषण के विरुद्ध संघर्ष
13. मानवीय संवेदना
14. वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण
15. भाषा और शिल्प में प्रयोगशीलता
16. मुक्तछंद और नई काव्य-भाषा
17. प्रतीकात्मकता और बिंबात्मकता
18. व्यंग्य एवं विडंबना
19. लोकतांत्रिक चेतना
20. वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद का प्रभाव
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8. आधुनिकता और आधुनिकतावाद में अंतर
आधुनिकता आधुनिकतावाद
1 यह व्यापक जीवन-दृष्टि है।
आधुनिकतावाद साहित्यिक - सांस्कृतिक प्रवृत्ति है।
2.इसका संबंध समाज और जीवन के परिवर्तन से है। इसका संबंध साहित्य में उस परिवर्तन की अभिव्यक्ति से है।
आधुनिकतावाद: विज्ञान, तर्क, स्वतंत्रता और समानता प्रमुख हैं। इसमें आधुनिक जीवन की जटिलता, संकट, अकेलापन और विडंबना प्रमुख हैं।
3.यह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में दिखाई देती है।
आधुनिकतावाद मुख्यतः साहित्य और कला में अभिव्यक्त होती है।
4.आधुनिकता आधुनिक चेतना का आधार है। आधुनिकतावाद उस चेतना की साहित्यिक अभिव्यक्ति है।
9. निष्कर्ष
अतः आधुनिकता केवल ‘नया’ होने का नाम नहीं है। यह नए ढंग से सोचने, प्रश्न करने, परंपराओं का पुनर्मूल्यांकन करने और मनुष्य की स्वतंत्रता तथा गरिमा को स्वीकार करने की चेतना है। आधुनिक हिंदी कविता ने इस चेतना को व्यापक रूप से अभिव्यक्त किया है। आधुनिक कवि ने व्यक्ति के अकेलेपन से लेकर सामाजिक शोषण, राजनीतिक भ्रष्टाचार, स्त्री अस्मिता, आर्थिक विषमता और अस्तित्वगत संकट तक को अपनी कविता का विषय बनाया।
इस दृष्टि से आधुनिक हिंदी कविता अपने समय की साक्षी भी है और अपने समय से प्रश्न करने वाली रचनात्मक शक्ति भी। आधुनिकतावाद ने हिंदी कविता को नए विषय, नई संवेदना, नई भाषा और नए शिल्प प्रदान किए तथा कविता को जीवन की वास्तविक जटिलताओं के अधिक निकट ला दिया।
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