5955758281021487 Hindi sahitya : प्रश्न : जयशंकर प्रसाद की कहानी “शरणागत” का कथानक, मूल पाठ, कथा-योजना, वातावरण तथा भाषा-शैली का वर्णन कीजिए।

शनिवार, 7 मार्च 2026

प्रश्न : जयशंकर प्रसाद की कहानी “शरणागत” का कथानक, मूल पाठ, कथा-योजना, वातावरण तथा भाषा-शैली का वर्णन कीजिए।

प्रश्न : जयशंकर प्रसाद की कहानी “शरणागत” का कथानक, मूल पाठ, कथा-योजना, वातावरण तथा भाषा-शैली का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
1. प्रस्तावना
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के प्रमुख छायावादी साहित्यकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने कविता, नाटक, उपन्यास और कहानी सभी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कहानियों में भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदना और ऐतिहासिक चेतना का सुंदर समन्वय मिलता है। “शरणागत” उनकी प्रसिद्ध कहानी है, जो उनके कहानी-संग्रह छाया (कहानी संग्रह) में संकलित है। यह कहानी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय की परिस्थितियों का चित्रण मिलता है।
कहानी का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति की महान परंपरा “शरणागत की रक्षा” तथा भारतीय पारिवारिक जीवन के आदर्शों को प्रस्तुत करना है।
2. मूल कथ्य (विषयवस्तु)
“शरणागत” कहानी का मूल विषय भारतीय संस्कृति की उदारता, करुणा और अतिथि-सत्कार की भावना को प्रस्तुत करना है। इसमें यह दिखाया गया है कि भारतीय परंपरा में यदि शत्रु भी शरण में आ जाए तो उसकी रक्षा करना धर्म माना जाता है।
कहानी में भारतीय नारी के आदर्श, पति-पत्नी के संबंधों की मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों का भी उज्ज्वल चित्रण किया गया है। साथ ही यह भी दिखाया गया है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव विदेशी लोगों पर भी पड़ सकता है।
3. कथानक (कहानी का सार)
कहानी की शुरुआत यमुना तट के एक सुंदर प्रातःकालीन दृश्य से होती है। कुछ स्त्रियाँ स्नान करने के लिए यमुना नदी में जाती हैं। उसी समय एक युवती सुकुमारी तेज धारा में बहने लगती है। उसे एक नाव में बैठे अंग्रेज दंपति बचा लेते हैं।
वास्तव में वह अंग्रेज दंपति 1857 के सैनिक विद्रोह के कारण भयभीत होकर भाग रहे होते हैं। वे चंदनपुर के जमींदार ठाकुर किशोर सिंह के घर पहुँचते हैं। ठाकुर किशोर सिंह उदार और दयालु स्वभाव के व्यक्ति होते हैं। वे उस अंग्रेज दंपति को अपने घर में शरण देते हैं और उनका पूरा आदर-सत्कार करते हैं।
इस दौरान अंग्रेज महिला ऐलिस भारतीय परिवार की जीवन-पद्धति को देखकर प्रभावित होती है। वह देखती है कि सुकुमारी अपने पति के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती है और उनके सामने बैठने में संकोच करती है।
धीरे-धीरे ऐलिस भारतीय संस्कृति और रीति-रिवाजों से प्रभावित हो जाती है। वह भारतीय वस्त्र पहनती है और भारतीय जीवन-शैली को अपनाने का प्रयास करती है। अंत में जब परिस्थितियाँ शांत हो जाती हैं तो अंग्रेज दंपति अपने घर लौटने की तैयारी करते हैं। ठाकुर किशोर सिंह अपने सैनिकों के साथ उन्हें सुरक्षित पहुँचाने की व्यवस्था करते हैं।
इस प्रकार कहानी भारतीय संस्कृति की उदारता और मानवीयता का आदर्श प्रस्तुत करती है।
4. कथा-योजना (रचना-संरचना)
कहानी की कथा-योजना बहुत ही सुगठित और प्रभावशाली है। लेखक ने कहानी को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया है।
प्रारंभ में प्रकृति-चित्रण और यमुना तट का दृश्य।
सुकुमारी का नदी में बहना और अंग्रेज दंपति द्वारा उसका बचाया जाना।
अंग्रेज दंपति का ठाकुर किशोर सिंह के घर पहुँचना।
भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं का चित्रण।
ऐलिस का भारतीय जीवन से प्रभावित होना।
अंत में अंग्रेज दंपति का सुरक्षित विदा होना।
इस प्रकार कहानी में घटनाएँ स्वाभाविक क्रम में विकसित होती हैं और पाठक की रुचि अंत तक बनी रहती है।
5. पात्र-चित्रण
कहानी में कुछ प्रमुख पात्र हैं –
(1) ठाकुर किशोर सिंह – वे उदार, साहसी और दयालु जमींदार हैं। वे शरणागत की रक्षा को अपना कर्तव्य मानते हैं।
(2) सुकुमारी – वह आदर्श भारतीय नारी का प्रतीक है। वह पति-परायण, विनम्र और संस्कारी है।
(3) ऐलिस – वह अंग्रेज महिला है, जो भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर भारतीय जीवन-शैली को अपनाने लगती है।
(4) विलफ्रेड – ऐलिस का पति, जो विद्रोह के कारण भयभीत है और ठाकुर किशोर सिंह की शरण में आता है।
6. वातावरण (देश-काल)
कहानी का वातावरण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दोनों प्रकार का है।
कहानी की पृष्ठभूमि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की है।
यमुना तट का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत सुंदर और शांतिपूर्ण है।
ग्रामीण जीवन, जमींदारी व्यवस्था और भारतीय पारिवारिक वातावरण का सजीव चित्रण मिलता है।
इस वातावरण के माध्यम से लेखक ने उस समय की सामाजिक परिस्थितियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
7. भाषा-शैली
जयशंकर प्रसाद की भाषा अत्यंत सरल, साहित्यिक और भावपूर्ण है।
भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है।
शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक है।
प्रकृति-चित्रण अत्यंत प्रभावशाली है।
संवाद छोटे-छोटे और स्वाभाविक हैं।
कहीं-कहीं काव्यात्मकता भी दिखाई देती है, जिससे कहानी का सौंदर्य बढ़ जाता है।
8. उद्देश्य
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति की महान परंपरा को उजागर करना है। लेखक यह बताना चाहते हैं कि भारतीय संस्कृति में शत्रु भी यदि शरण में आ जाए तो उसकी रक्षा करना हमारा धर्म है। साथ ही भारतीय पारिवारिक जीवन की मर्यादा और आदर्शों को भी प्रस्तुत किया गया है।
9. निष्कर्ष
इस प्रकार “शरणागत” कहानी भारतीय संस्कृति, उदारता और मानवीयता का सुंदर उदाहरण है। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। कथा-योजना, पात्र-चित्रण, वातावरण और भाषा-शैली सभी दृष्टियों से यह कहानी अत्यंत प्रभावपूर्ण और शिक्षाप्रद है

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