उसने कहा था' कहानी का कथानक, संवाद, पात्र-योजना, उद्देश्य, वातावरण, भाषा-शैली, विकास-क्रम तथा प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण सहित समग्र समीक्षा कीजिए।
भूमिका :
चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' द्वारा लिखित ‘उसने कहा था’ हिंदी कहानी-जगत की एक मील का पत्थर मानी जाती है। यह केवल हिंदी की प्रथम मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कहानी नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक कहानी का प्रारंभ भी माना जाता है। इसमें प्रेम, कर्तव्य, त्याग और बलिदान की गहन अनुभूति विद्यमान है। कहानी 1915 में प्रकाशित हुई थी और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
1. कथानक (Plot) :
कथानक सरल किंतु हृदयग्राही है। कहानी की घटनाएँ तीन चरणों में विभाजित हैं –
1. बचपन का मिलन : अमृतसर की गलियों में लहना सिंह एक बालिका से मिलता है। बालिका पूछती है – "तू मेरे लिए क्या कर सकता है?" लहना सहज उत्तर देता है – "उसने कहा था।" यही वाक्य पूरी कहानी का जीवन-सूत्र बन जाता है।
2. युवावस्था और संयोग : लहना सिंह बड़ा होकर सेना में भर्ती हो जाता है। प्रथम विश्व युद्ध के समय वह फ्रांस के मोर्चे पर जाता है। वहीं उसे वही स्त्री मिलती है, जो अब किसी अन्य की पत्नी है और उसके तीन बच्चे हैं।
3. बलिदान : युद्ध के भीषण दौर में लहना सिंह अपनी जान देकर उस स्त्री के पति और बच्चों को बचाता है। मरते समय उसे वही बचपन का वचन याद आता है – "उसने कहा था।"
कथानक रेखीय (linear) है, किंतु इसमें संवेदना और भावनात्मक गहराई अपार है।
2. संवाद (Dialogue) :
संवाद छोटे-छोटे, स्वाभाविक और प्रभावकारी हैं।
बचपन का संवाद – “तू मेरे लिए क्या कर सकता है?” और “उसने कहा था” – कहानी का शाश्वत प्रतीक बन गया है।
युद्धस्थल के संवादों में वीरता और कर्तव्य की भावना झलकती है।
संवाद पात्रों की मानसिक स्थिति और भावों को प्रकट करने में सफल हैं।
3. पात्र-योजना (Characterization) :
कहानी में प्रमुख और गौण पात्रों की योजना सुव्यवस्थित है।
लहना सिंह : कहानी का नायक, वीर, निष्ठावान, वचनबद्ध और बलिदानी।
स्त्री (बाल्यकाल की सखी, अब किसी की पत्नी) : करुणा और मातृत्व की मूर्ति।
स्त्री का पति : सहयोद्धा, सामान्य किंतु संघर्षशील।
अन्य सैनिक पात्र : पृष्ठभूमि निर्माण में सहायक।
पात्र संख्या कम है, किंतु सभी पात्र कथानक को गति और गहराई प्रदान करते हैं।
4. उद्देश्य (Purpose) :
कहानी का मूल उद्देश्य यह दिखाना है कि –
भारतीय संस्कृति में वचन का महत्व सर्वोपरि है।
प्रेम केवल व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बल्कि त्याग और कर्तव्य का रूप भी हो सकता है।
युद्ध मानवता का शत्रु है, किंतु उसी में भी बलिदान और उदात्त मानव-मूल्य अंकुरित हो सकते हैं।
5. वातावरण (Setting) :
बचपन का वातावरण : अमृतसर की गलियाँ, मासूमियत और निश्छलता से भरा हुआ।
युद्ध का वातावरण : फ्रांस के युद्धक्षेत्र का भीषण दृश्य, गोलियों, तोपों और बारूद की गंध से भरा हुआ।
वातावरण पाठक को उसी दौर में ले जाता है और कथा को जीवंत बना देता है।
6. भाषा-शैली (Language & Style) :
भाषा सरल, सहज, बोलचाल की पंजाबी मिश्रित हिंदी है।
शैली वार्तालाप प्रधान और मनोवैज्ञानिक है।
स्थान-विशेष और पात्रानुकूल भाषा ने यथार्थ का वातावरण रचा है।
अलंकारिकता कम है, किंतु संवेदनात्मक गहराई अधिक है।
7. कहानी का चार तात्विक विकास (Four Stages of Story Development) :
1. प्रारंभ (Exposition) : बाल्यकाल की मुलाकात और वचन।
2. संघर्ष (Conflict) : युद्धभूमि और जीवन-मरण की स्थिति।
3. चरमोत्कर्ष (Climax) : लहना सिंह का बलिदान।
4. उपसंहार (Resolution) : वचन-पूर्ति और अमर प्रेम का संदेश।
8. प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण :
(क) लहना सिंह :
बचपन में चंचल, हठी और ईमानदार।
युवावस्था में साहसी सैनिक, जो कर्तव्य और वचन दोनों को निभाता है।
उसका चरित्र त्याग और बलिदान का प्रतीक है।
अंततः वह आदर्श नायक के रूप में प्रस्तुत होता है।
(ख) स्त्री (नायिका) :
बचपन में चंचल और प्रश्नाकुल।
विवाह के बाद जिम्मेदार पत्नी और माँ।
उसका व्यक्तित्व मातृत्व, करुणा और मर्यादा का प्रतिनिधि है।
(ग) स्त्री का पति :
सहयोद्धा, जो साधारण सैनिक होते हुए भी पारिवारिक उत्तरदायित्व का बोझ उठाता है।
लहना सिंह के बलिदान के कारण उसका परिवार सुरक्षित रहता है।
9. विशेषताएँ :
कहानी में मनोवैज्ञानिक चित्रण है।
यथार्थवाद और आदर्शवाद का अद्भुत संगम है।
इसमें राष्ट्रीयता, कर्तव्य और प्रेम तीनों का सुंदर संतुलन है।
"उसने कहा था" वाक्यांश कहानी को अमर बना देता है।
10. उपसंहार :
‘उसने कहा था’ हिंदी की प्रथम परिपूर्ण कहानी कही जाती है। इसमें न केवल कथानक की सुदृढ़ता है, बल्कि भावनात्मक गहराई और मानवीय संवेदना भी है। लहना सिंह का चरित्र त्याग और वचनबद्धता की मूर्ति बनकर पाठक के मन में अमर हो जाता है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम त्याग और बलिदान में निहित होता है। यही कारण है कि यह आज भी हिंदी साहित्य की धरोहर मानी जाती है।