उत्तर:
Swami Vivekananda आधुनिक भारत के उन महान चिंतकों में से हैं जिन्होंने व्यक्तित्व विकास को केवल बाहरी आकर्षण या बौद्धिक दक्षता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति का समन्वित रूप माना। उनके अनुसार व्यक्तित्व का वास्तविक विकास भीतर की शक्तियों के जागरण से होता है। महाविद्यालय स्तर पर उनके व्यक्तित्व विकास संबंधी विचार निम्न प्रकार से स्पष्ट किए जा सकते हैं—
1. आत्मविश्वास और आत्मश्रद्धा
विवेकानंद का प्रसिद्ध कथन है— “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”
वे मानते थे कि प्रत्येक मनुष्य में अनंत शक्तियाँ निहित हैं। आत्मविश्वास के बिना व्यक्तित्व अधूरा है।
2. शिक्षा का वास्तविक अर्थ
उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, मनोबल और आत्मनिर्भरता का विकास करना है। वे कहते थे— “शिक्षा मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।”
3. चरित्र निर्माण पर बल
व्यक्तित्व विकास का मूल आधार चरित्र है। सत्य, निष्ठा, अनुशासन और नैतिकता को उन्होंने सशक्त व्यक्तित्व की आधारशिला माना।
4. शारीरिक सुदृढ़ता
विवेकानंद के अनुसार स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास संभव है। उन्होंने युवाओं को बलवान बनने और साहस विकसित करने की प्रेरणा दी।
5. सकारात्मक सोच
वे निराशा और भय को व्यक्तित्व का शत्रु मानते थे। उनका मानना था कि सकारात्मक दृष्टिकोण से ही व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
6. सेवा भावना और मानवता
व्यक्तित्व विकास केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज सेवा से भी जुड़ा है। उन्होंने “नर सेवा ही नारायण सेवा” का संदेश दिया।
7. नेतृत्व क्षमता
विवेकानंद ने युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों ने अनेक युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और आत्मगौरव जगाया।
8. आध्यात्मिक विकास
उनके अनुसार आत्मज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से ही व्यक्तित्व पूर्ण होता है। आध्यात्मिकता व्यक्ति को संतुलन और स्थिरता प्रदान करती है।
9. लक्ष्य निर्धारण और परिश्रम
वे लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर परिश्रम को सफलता की कुंजी मानते थे।
10. राष्ट्र निर्माण से संबंध
विवेकानंद का मानना था कि सशक्त व्यक्तित्व ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसलिए युवाओं का सर्वांगीण विकास आवश्यक है।
निष्कर्ष
स्वामी विवेकानंद की व्यक्तित्व विकास की अवधारणा आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वासी, नैतिक, साहसी और राष्ट्रभक्त बनने की प्रेरणा दी। उनके विचार महाविद्यालय के छात्रों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं, क्योंकि वे केवल शैक्षिक सफलता नहीं, बल्कि समग्र और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण पर बल देते
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