5955758281021487 Hindi sahitya : संस्मरण : परिभाषा और हिंदी संस्मरण लेखन परंपरा

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

संस्मरण : परिभाषा और हिंदी संस्मरण लेखन परंपरा

संस्मरण : परिभाषा और हिंदी संस्मरण लेखन परंपरा

1. संस्मरण की परिभाषा
‘संस्मरण’ शब्द ‘स्मरण’ धातु में ‘सम्’ उपसर्ग लगने से बना है, जिसका अर्थ है—किसी व्यक्ति, घटना या अनुभव को स्मृति के आधार पर पुनः प्रस्तुत करना। साहित्य में संस्मरण वह गद्य-विधा है जिसमें लेखक अपने जीवन से जुड़े व्यक्तियों, घटनाओं, स्थानों या विशेष अनुभवों को आत्मीयता और सत्यता के साथ प्रस्तुत करता है।
संस्मरण आत्मकथा से भिन्न होता है, क्योंकि आत्मकथा में पूरे जीवन का क्रमबद्ध वर्णन होता है, जबकि संस्मरण में केवल विशेष व्यक्तियों या घटनाओं का स्मृति-आधारित चित्रण किया जाता है। इसमें तथ्यात्मकता के साथ भावात्मकता भी रहती है।
मुख्य विशेषताएँ:
स्मृति-आधारित लेखन
आत्मीयता और संवेदनशीलता
व्यक्तित्व या घटना का चित्रात्मक वर्णन
सरल एवं प्रभावपूर्ण भाषा
सत्यता और विश्वसनीयता
2. हिंदी संस्मरण लेखन की परंपरा
हिंदी साहित्य में संस्मरण लेखन का विकास आधुनिक काल में विशेष रूप से हुआ। भारतेन्दु युग और द्विवेदी युग में पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से संस्मरणात्मक लेखन प्रारंभ हुआ, परंतु यह विधा छायावाद और उसके बाद अधिक परिपक्व हुई।
(क) प्रारंभिक विकास
द्विवेदी युग में साहित्यकारों के जीवन और अनुभवों को लिखने की प्रवृत्ति बढ़ी। इस काल में संस्मरणात्मक निबंधों की शुरुआत हुई।
(ख) छायावादोत्तर काल
छायावाद के बाद संस्मरण लेखन को व्यापक पहचान मिली। इस काल के प्रमुख साहित्यकारों ने अपने समकालीनों और जीवनानुभवों को संस्मरण के रूप में प्रस्तुत किया।
महादेवी वर्मा की कृति ‘अतीत के चलचित्र’ संस्मरण साहित्य की महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन से जुड़े व्यक्तियों का मार्मिक चित्रण किया।
रामवृक्ष बेनीपुरी ने भी संस्मरणात्मक शैली में अनेक रचनाएँ लिखीं।
हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथात्मक कृतियों में संस्मरणात्मक तत्व प्रमुख हैं।
(ग) समकालीन संस्मरण
आधुनिक काल में संस्मरण लेखन और अधिक प्रामाणिक एवं विविधतापूर्ण हुआ है। साहित्यकारों, राजनेताओं, पत्रकारों और कलाकारों ने अपने अनुभवों को संस्मरण के रूप में प्रस्तुत किया है।
3. संस्मरण का महत्व
यह इतिहास और साहित्य के बीच सेतु का कार्य करता है।
किसी युग और व्यक्तित्व को समझने में सहायक होता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है।
पाठक को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
निष्कर्ष
अतः संस्मरण हिंदी गद्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें लेखक अपनी स्मृतियों के माध्यम से व्यक्तियों और घटनाओं का सजीव चित्रण करता है। आधुनिक हिंदी साहित्य में यह विधा विशेष रूप से विकसित हुई और आज भी अत्यंत लोकप्रिय है।

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