5955758281021487 Hindi sahitya : एकांकी किसे कहते हैं ?उसकी परिभाषा तत्व तथा विशेषताएं

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

एकांकी किसे कहते हैं ?उसकी परिभाषा तत्व तथा विशेषताएं

एकांकी किसे कहते हैं? उसके तत्त्व एवं विशेषताएँ


प्रस्तावना
हिंदी नाट्य साहित्य में एकांकी का महत्वपूर्ण स्थान है। आधुनिक युग में नाट्य विधा के संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप के रूप में एकांकी का विशेष विकास हुआ। जहाँ पूर्ण नाटक कई अंकों में विभाजित होता है, वहीं एकांकी केवल एक ही अंक में समाप्त हो जाता है।
एकांकी की परिभाषा
‘एकांकी’ शब्द ‘एक’ और ‘अंक’ से मिलकर बना है। अर्थात् वह नाटक जो केवल एक ही अंक में पूरा हो जाए, उसे एकांकी कहते हैं।
प्रसिद्ध नाटककार जयशंकर प्रसाद ने नाटक को जीवन की प्रतिछाया माना है, और उसी परंपरा में एकांकी जीवन की किसी एक घटना या भाव को केंद्र में रखकर रचा जाता है।
संक्षेप में —
एक घटना, एक स्थान, सीमित पात्रों और संक्षिप्त कथानक में प्रस्तुत नाटक को एकांकी कहा जाता है।
एकांकी के तत्त्व
एकांकी के मुख्य तत्त्व निम्नलिखित हैं—
1. कथानक (Plot)
एकांकी का कथानक संक्षिप्त, सुसंगठित और प्रभावशाली होता है। इसमें अनावश्यक प्रसंग नहीं होते।
2. पात्र (Characters)
पात्रों की संख्या सीमित होती है। प्रत्येक पात्र का स्पष्ट उद्देश्य और महत्त्व होता है।
3. संवाद (Dialogue)
संवाद छोटे, सारगर्भित और प्रभावपूर्ण होते हैं। संवादों के माध्यम से ही कथा आगे बढ़ती है।
4. देशकाल (Setting)
एकांकी में सामान्यतः एक ही स्थान और सीमित समय का चित्रण होता है।
5. उद्देश्य (Purpose)
एकांकी का उद्देश्य किसी सामाजिक, नैतिक या मानवीय संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना होता है।
6. संघर्ष (Conflict)
संघर्ष एकांकी का प्राण तत्व है। कथा का विकास किसी न किसी द्वंद्व पर आधारित होता है।
एकांकी की विशेषताएँ
संक्षिप्तता – एक ही अंक में पूर्ण।
एकता का सिद्धांत – समय, स्थान और कार्य की एकता।
सीमित पात्र – कम पात्र, स्पष्ट चरित्र-चित्रण।
त्वरित गति – कथा तेजी से आगे बढ़ती है।
प्रभावशीलता – अंत में गहरा प्रभाव छोड़ती है।
मंचन में सरलता – कम संसाधनों में प्रस्तुत की जा सकती है।
एक मुख्य घटना – केवल एक केंद्रीय समस्या पर आधारित।
संवाद प्रधानता – संवादों के माध्यम से कथा-विकास।
चरमबिंदु (Climax) – अंत में तीव्र भावनात्मक या नाटकीय स्थिति।
संदेशात्मकता – समाजोपयोगी संदेश का संप्रेषण।
उपसंहार
इस प्रकार एकांकी नाट्य साहित्य की एक सशक्त और लोकप्रिय विधा है। यह कम समय में अधिक प्रभाव उत्पन्न करती है। आधुनिक युग की व्यस्त जीवनशैली में एकांकी की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।
अतः कहा जा सकता है कि —
एकांकी संक्षिप्त होते हुए भी प्रभाव और उद्देश्य की दृष्टि से पूर्ण नाटक के समान ही महत्त्वपूर्ण है।

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